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Friday, February 19, 2010

आख़िरकार सफल माँ

विगत सप्ताह इक विवाह सम्पन्न हुआ| काफी परेशानियों से टकराकर इक अकेली माँ ने अपनी सुंदर और गुणवान बेटी के लिए घर ढूंढा| दैवयोग से वही सज्जन इस विवाह में भी पधारे जिनकी चर्चा मैंने "थीम अच्छी है" पोस्ट पर की है| लड़का काफी अच्छा था, हर दृष्टि से, जिम्मे दार और उसी जाति में लेकिन उप-वर्ग दूसरा था| उसकी "आख़िरकार सफल माँ"  को ये वचन सुना दिए गये| कि केवल दूसरे उप-वर्ग में होने कि वजह से कोई कदम नहीं उठा रहा हूँ, अगर दूसरी जाति में वर होता तो मै आसमान सर पर उठा लेता| लडकी कि माँ ने उस समय तो धैर्य रखा| बाद में मुझे व्यक्तिगत रूप से मुखातिब होते हुए बोली "वेदिका  जब मेरी सायानी बेटी के वर के लिए कोई आगे नही आया तो अगर मै अंतरजातीय विवाह करा देती तो भी क्या बुरा होता, और सच तो ये है कि अगर ये आसमान भी सर पर उठा लेते तो मै इनसे कहती श्रीमान जी आप राह नापिए, मै मेरी बेटी कि शादी जाति से नहीं इन्सान से कर रही हूँ|"
मै उनके सामने नतमस्तक हो गयी जो स्त्री, और प्रौढ़, होकर भी किसी भी पूर्वाग्रह से ग्रसित नही थीं| दुःख हुआ तो केवल इस बात का कि उनके शुभ-मंगल कार्य में इक अदना आदमी उन्हें मानसिक रूप से उनको आहत कर गया| और न जाने क्यों वे उसे प्रतिउत्तर न दे पायीं| शायद वे अपनी बेटी के विवाह से इतनी खुश थीं कि ये बात उनके ह्रदय को कचोट न सकी| ईश्वर उन्हें हमेशा खुश रखे|

7 comments:

  1. Aameen...
    word verification hata lijiye
    iski wajah se kai log comment nahin karte

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  2. ईश्वर उन्हें खुश रखे!!

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  3. यही तो हमारे समाज की विडंवना है। लडकी वालों को ऐसे लोगों के हाथों कितनी मानसिक प्रताडना सहनी पडती है शायद इसका अन्दाज़ा लडके वाले नही लगा सकते। मगर हम लोग इसके लिये चाह कर भी कुछ नही कर पाते। धन्यवाद

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  4. उन्होने सही कहा था...शादी इंसान से की जाती है ना कि जाति से

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  5. शादी इंसान से की जाती है ना कि जाति से.शानदार
    .धन्यवाद.

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  6. श्रीमान जी आप राह नापिए, मै मेरी बेटी कि शादी जाति से नहीं इन्सान से कर रही हूँ|"

    great........bahut sundar vaaky ..likhdiya hain aapne

    aapko shubh kamna ..likhate raho

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