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Friday, February 19, 2010

थीम अच्छी है

पिछले दिनों इक अतिथि घर पर आये| वे बचपन से ही मुझे या मेरे साथ वालों को किसी लायक नहीं समझते| लेकिन वे अपने घर की बेटियों को बहुत अच्छी सोच का, समझते है| चाहे उनकी बेटियां किसी भी निष्कर्ष पर पहुंचे| बात हो रही थी इक फिल्म के बारे में "my name is khan" तो मुझसे पूंछा गया की क्या है इस फिल्म में ? मैंने कहा "थीम अच्छी है" तो मुझे तुरंत लौट के जबाब मिला "थीम अच्छी चाहिए तो "श्रवण कुमार , हरिश्चंद्र" पढो| मै अवाक् रह गयी| ये वही इन्सान थे जिनकी माँ दर-ब-दर परेशान होती रही| उनकी मृत्यु बहुत बुरे हालातों में हुयी| लेकिन यदि उनकी बेटियों ने कोई भी टिप्पणी दी होती तो उसे वो जरुर उत्साहित करते| मै समझ नही पाती हूँ उनको कभी|  मेरे ख्याल से कोई भी वैश्विक विषय व्यर्थ नहीं है| अगर हम किसी विषय की चर्चा करते है तो इसका यह अर्थ कदापि नहीं की हम दूसरे विषयों की अवहेलना कर रहे है|

कई साल पहले वे हमारे घर पधारे, मेरी माँ ने उन्हें बताया की "मेरी बेटी बहुत अच्छी कवितायेँ लिखती है| बोले दिखाओ , तो मैंने दस कवितायेँ थमा दी| बोले और है की इतनी ही ? मैंने ४५ पन्ने दे दिए| बोले अगर १०० होती तो इक किताब निकलवाते| मैंने तुरंत इक कलेक्शन उन्हें थमा दिया जिसमें १२२ कवितायेँ थी| उन्होंने उसे १० मिनिट पढ़ा और बोले "लो रख लो"| इक भी शब्द प्रोत्साहन का उनकी जिव्हा पर नहीं आया|क्या चाहते थे वो ??????मैंने वापस अपने कागज़ रख लिए| 

जब भी वो मेरे घर  आते है, ऐसा कुछ जरुर बोलते हैं की मेरा आत्मसम्मान आहत होता है| पिछले दिनों मैंने उन्हें अपना ब्लॉग दिखाया तो "इन सब कामों में क्या रखा है"? मै समझ नहीं पाती की उन्हें क्या जबाब दूँ? क्योकि मै उनके साथ साथ अपने माता-पिता का भी सम्मान रखना चाहती हूँ जिनके बुलावे पर वह आते है

मै स्पष्ट कर दूँ ये सज्जन मुझे ३० वर्ष वरिष्ठ है|

3 comments:

  1. उन सज्जन को मेरा प्रणाम है
    बस प्रणाम की कर सकती हू

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  2. एक दूसरे को समझना वाकई बहुत जरूरी है।

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  3. Bahun achi rachna apki. hota ha kabhi kabhi asa bhi but ase log bahut kam hote hain. asl mai admi am bation ko lekar eak dusre sa dwase aur gharna karne lagta hai. but ase bhi kuch log hote hain jo eak alg soch ka adhar par apni bat karte aur kahate hain.
    Subha diwas.

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